1. फेडरल रिजर्व की बैठक और बाजार पर इसका असर [0]

thumbnail फेडरल रिजर्व की बैठक में ब्याज दरों पर होने वाले फैसले का अमेरिकी और भारतीय बाजारों पर महत्वपूर्ण असर पड़ेगा, खासकर आरबीआई के रुख के कारण।

1.1. फेड के ब्याज दर वृद्धि का अनुमान और बाजार की प्रतिक्रिया [0]

  1. अमेरिका में फेडरल रिजर्व की एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है, जिस पर बाजार की नजर है। [0]
    1. इस बैठक के फैसले से पहले अमेरिकी बाजारों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। [0]
    2. भारतीय समय के अनुसार रात 11:30 बजे फेड का फैसला आने की उम्मीद है। [0]
  2. बाजार का अनुमान है कि फेड 25 बेसिस प्वाइंट की ब्याज दर बढ़ाएगा। [0]
    1. यूएस बॉन्ड मार्केट में लगभग 94% संभावना है कि दरें बढ़ेंगी। [0]
    2. बैंक ऑफ अमेरिका का मानना है कि अगर दरें नहीं बढ़ीं, तो यह अप्रत्याशित होगा। [0]
  3. फेड की कमेंट्री (भविष्य की योजनाओं पर बयान) बाजार के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगी। [0]
    1. डवेश हॉक कमेंट्री का मतलब है कि फेड चेयरमैन कहेंगे कि यह सिर्फ एक बार की बढ़ोतरी है और आगे और बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। [0]
    2. हॉकिश हॉक कमेंट्री का मतलब है कि फेड चेयरमैन कहेंगे कि दर वृद्धि का चक्र शुरू हो गया है और मुद्रास्फीति के कारण आगे भी बढ़ोतरी हो सकती है, जो बाजार के लिए नकारात्मक होगा। [0]

1.2. ब्याज दर वृद्धि के संभावित प्रभाव [1]

  1. ब्याज दर बढ़ने से उभरते बाजारों पर सीधा असर पड़ता है। [1]
    1. डॉलर की मांग बढ़ने से डॉलर मजबूत होता है। [1]
    2. लोगों की खर्च करने की क्षमता कम होती है, क्योंकि ईएमआई बढ़ने से वे खर्च कम करते हैं, जिससे मंदी का खतरा रहता है। [1]
  2. सोने और चांदी पर भी ब्याज दरों में वृद्धि का असर होता है। [1]
  3. भारत के लिए आरबीआई का रुख फेड के फैसले से ज्यादा महत्वपूर्ण होगा। [2]
    1. भारत में मुद्रास्फीति उम्मीद से ज्यादा (4.86%) आई है, जो जुलाई में 4.45% थी और आरबीआई के अनुमान (4.7%) से अधिक है। [2]
    2. अगर फेड दरें बढ़ाता है और आरबीआई नहीं बढ़ाता है, तो रुपये पर दबाव आ सकता है, जिससे आउटफ्लो (पैसे का बाहर जाना) हो सकता है। [2]
    3. आरबीआई के पास अभी भी मुद्रा भंडार पर्याप्त है, जिससे वह रुपये को स्थिर कर सकता है। [2]
  4. आईटी सेक्टर पर ब्याज दर वृद्धि का नकारात्मक असर हो सकता है। [2]
    1. यूएस में ब्याज दरें बढ़ने से विवेकाधीन खर्च (discretionary consumption) कम होता है, जिससे आईटी उत्पादों की मांग घट सकती है। [2]
    2. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के प्रभाव के कारण आईटी सेक्टर में रोलरकोस्टर जैसी स्थिति बनी रहेगी, जिसमें खबरें आने पर शेयर ऊपर-नीचे होते रहेंगे। [2]