1. वैश्विक बाज़ार पर अमेरिकी मौद्रिक नीति का प्रभाव [0]

अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि के कारण वैश्विक बाज़ारों में बड़ी गिरावट आई, जिससे डॉलर इंडेक्स में तेज़ी आई और सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट आई।

1.1. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक और ब्याज दरों में वृद्धि [0]

  1. बाजार की उम्मीदें और निर्णय [0]
    1. वैश्विक बाज़ार की नज़र अमेरिका में होने वाली महत्वपूर्ण फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक पर थी, जहाँ ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना थी। [0]
    2. फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि की, जिससे फेडरल फंड दर 3.5% से 3.75% से बढ़कर 3.75% से 4% हो गई। [3]
    3. यह 2026 में पहली बार था जब अमेरिका में ब्याज दरों में बदलाव किया गया, क्योंकि जनवरी से सितंबर तक कोई बदलाव नहीं हुआ था। [3]
  2. ब्याज दरें बढ़ाने के कारण [3]
    1. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और रूस-यूक्रेन संकट जैसे भू-राजनीतिक कारक बाज़ार को प्रभावित कर रहे थे। [3]
    2. अमेरिका में मुद्रास्फीति (महंगाई) फेडरल रिजर्व के 2% के लक्ष्य से लगातार ऊपर चल रही थी, जो अगस्त 2026 में लगभग 3.4% थी। [3]
    3. बॉन्ड यील्ड (सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न) लगभग 5% के आसपास पहुंच गया था, जो ब्याज दरों में बढ़ोतरी का संकेत दे रहा था। [3]
    4. डॉलर इंडेक्स भी ऊपर की ओर बढ़ रहा था, जो ब्याज दरों में वृद्धि का एक और संकेत था। [3]

1.2. मौद्रिक नीति के बाद बाज़ार की प्रतिक्रिया [4]

  1. डॉलर इंडेक्स में तेज़ी [4]
    1. मौद्रिक नीति के निर्णय के बाद डॉलर इंडेक्स में तेज़ी से वृद्धि हुई, जो 100 के स्तर को पार कर गया। [4]
    2. डॉलर इंडेक्स में तेज़ी आमतौर पर सोने और चांदी के लिए नकारात्मक होती है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर सोने और चांदी का निपटान डॉलर में होता है। [4]
  2. सोने और चांदी में गिरावट [4]
    1. डॉलर इंडेक्स में तेज़ी के कारण सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आई, जो 4370 डॉलर प्रति औंस से नीचे गिर गया। [4]
    2. चांदी की कीमतों में भी नकारात्मक रुझान देखा गया। [4]
  3. अमेरिकी शेयर बाज़ार में गिरावट [4]
    1. डाउ जोंस में नीति घोषणा के बाद लगभग 52,175 पॉइंट की गिरावट देखी गई, जो 51,800 के महत्वपूर्ण समर्थन स्तर से नीचे चला गया। [4]
    2. यह गिरावट लगभग 100 दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज के समर्थन स्तर को तोड़ रही थी, जो एक बड़े करेक्शन का संकेत था। [13]
    3. S&P 500 में भी भारी गिरावट देखी गई। [19]
  4. भारतीय बाज़ार पर प्रभाव [4]
    1. गिफ्ट निफ्टी में भी गिरावट देखी गई, जो भारत के बाज़ार में नकारात्मक शुरुआत का संकेत दे रही थी। [7]
    2. भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहा था, जो USD/INR चार्ट में ऊपर की ओर रुझान से स्पष्ट था। [4]
    3. भारत के प्रमुख सूचकांक, जैसे निफ्टी और सेंसेक्स, महत्वपूर्ण समर्थन स्तरों से नीचे चल रहे थे। [0]
    4. कच्चे तेल की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई थीं, जिससे भारत के व्यापार घाटे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था। [0]

1.3. अन्य वैश्विक बाज़ार और आर्थिक संकेतक [0]

  1. यूरोपीय और एशियाई बाज़ार [0]
    1. जर्मनी का डेक्स और फ्रांस का CAC 40 जैसे यूरोपीय बाज़ार नीति से पहले सकारात्मक थे, लेकिन बाद में उनमें गिरावट आई। [7]
    2. जापान का निक्केई बाज़ार भी नीति से पहले तेज़ी में था, लेकिन बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति शुक्रवार को आने वाली थी, जहाँ ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना थी। [7]
  2. भारत की आर्थिक स्थिति [0]
    1. भारत में खुदरा मुद्रास्फीति (CPI) अगस्त 2026 में 4.82% और थोक मूल्य मुद्रास्फीति (WPI) 9.92% थी, जो RBI के लक्ष्य से ऊपर थी। [3]
    2. भारत का व्यापार घाटा भी नकारात्मक था, क्योंकि निर्यात में सुधार नहीं हुआ था और आयात में कमी आई थी। [3]
    3. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति 5 से 7 अक्टूबर 2026 को आने वाली थी, जहाँ ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि की संभावना थी। [3]
  3. क्रिप्टोकरेंसी बाज़ार [4]
    1. बिटकॉइन और इथेरियम जैसे क्रिप्टोकरेंसी में नीति के बाद उतार-चढ़ाव देखा गया, लेकिन कुल मिलाकर सकारात्मक रुझान बना हुआ था। [4]
    2. बिटकॉइन के लिए 74,800 डॉलर का महत्वपूर्ण समर्थन स्तर था, जबकि इथेरियम के लिए 2350 डॉलर का समर्थन था। [15]
  4. फेड चेयरमैन की टिप्पणी [3]
    1. फेड चेयरमैन केविन वॉश ने कहा कि मुद्रास्फीति के रुझान "टेस्ट पास नहीं कर रहे हैं", जिसका अर्थ है कि मुद्रास्फीति अभी भी उच्च स्तर पर बनी हुई है। [17]
    2. उन्होंने यह भी बताया कि मुद्रास्फीति के कारण अमेरिकी श्रमिकों की क्रय शक्ति कम हो रही है। [21]
    3. आर्थिक वृद्धि को लेकर समिति अभी भी सकारात्मक थी, लेकिन मुद्रास्फीति पर उनका मुख्य ध्यान केंद्रित था। [18]
    4. 2026 में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम लग रही थी, और अक्टूबर और दिसंबर में होने वाली अगली बैठकों में भी ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना थी। [20]