00:00कि ऑप्शंस हां दोस्तों, यह एक ऐसी चीज है जिसका आप को बेसब्री से इंतजार था, और हम आज यह सिर्फ शुरू करने वाले हैं। हमारी जो बैक टू बैक वीडियो जाने वाली हैं, यह सीरीज आने वाली है ऑप्शंस के ऊपर तीन पार्ट में विभाजित होगी। स्टार्टिंग हम करेंगे बिलकुल बेसिक प्वाइंट से — ऑप्शंस क्या होता है, कॉल क्या होता है, पुश्य क्या होता है, बिल्कुल बेसिक से शुरू करेंगे। फिर सेकंड पार्ट में समझने की कोशिश करेंगे, यह सेकंड पार्ट सीरियस की आएगी, उसमें समझने की कोशिश करेंगे। अभी क्या है? जितने भी ब्रोकरेज हैं ना, जो भी स्टॉक ब्रोकर्स हैं, उनसे कुछ विशेष रणनीतियों के नाम इतने अजीब-से हैं कि इंसान जिसके नाम सुनकर डर जाता है। उन स्टेटिस्टिक्स की बात करेंगे, समझेंगे। क्यों सिर्फ और सिर्फ ब्रोकरेज के लिए यह टाइट जींस आपको प्रमोट की जाती है, और क्यों हमें यह चैप्टर ज्यों में ही करनी है। फाइनली, जो थर्ड ऑप्शन आएगा, जो थर्ड ट्रेंड जाएगा, और इस वीडियो सीरीज में हम समझेंगे कुछ इतनी आसान स्ट्रेटेजीज, इतनी आसानी से आप अपनी वाइफ और अपने बच्चों को समझ पाएंगे। ये इतना आसान होने वाला है कि आपको देखकर यार, ऑप्शंस मतलब इतना आसान कि आपने कभी सोचा ही नहीं था। यह हमारी कोशिश रहेगी और हमारा प्रयास रहेगा कि यह तो सीरियस ए कंप्लीट ऑप्शंस कि यह इंडिया की वन ऑफ द मोस्ट आसान और आसानी से लागू होने वाली सीरीज बनने वाली है। आशा करता हूँ आपको इस सीरीज में बहुत मजा आएगा। तो अभी ही इस चैनल को सब्सक्राइब करें और बेल आइकन क्लिक कर लें ताकि हम जुड़े रहें। मेरा नाम आनंद साड्डा है। तो चलिए शुरू करते हैं, आज का पहला बेसिक सेक्शन, पहला बेसिक वीडियो, कॉल ऑप्शंस और पूट ऑप्शंस, ये सारी डिटेल आपको क्लियर कर देंगे और मैं इसमें क्रिकेट से 20 को जोड़ने वाला हूँ ताकि आपके दिमाग को। सारे कंफ्यूजन का बेसिक पाठ का पहला पार्ट आज पूरा हो जाएगा। चलिए शुरू करते हैं आज का डिस्कशन। [संगीत] अजय को [संगीत] को सबसे पहले हमें समझना पड़ेगा कि ऑप्शन क्या होता है। ऑप्शन एक प्रकार का डेरिवेटिव है। अभी तक हमें ऑप्शन नहीं पता था, अब हमें एक और नई चीज़ का मोड आ गया है, डेरिवेटिव। और यह भी नहीं पता था। सबसे पहले हम समझते हैं, डेरिवेटिव्स क्या होता है। फिर हम समझेंगे ऑप्शन क्या होता है। फिर फाइनली हम चलेंगे कॉल और पुट के बारे में। सबसे पहले हम समझते हैं, डेरिवेटिव्स क्या होता है। डेरिवेटिव्स एक वित्तीय उपकरण (फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट) है, जो अपनी वैल्यू किसी थॉट प्रोडक्ट से निकालता है। एक सिंपल उदाहरण लेते हैं, समझिए कि आपके पास क्रेडिट कार्ड है। क्रेडिट कार्ड पर जो बोनस प्वाइंट मिलता है, या कैशबैक मिलता है, वह किस पर डिपेंड करता है? यह कि कितना क्रेडिट का इस्तेमाल हुआ। यही बोनस पॉइंट्स भी इस पर आधारित होते हैं। जो कैंसर हो गया, कैशबैक कट हो गया, वह बैटरी भटक अंडरलाइंग एसेट क्या हुआ, वह क्रेडिट कार्ड स्वाइप हुआ जैसा कि डेरिवेटिव्स में होता है। जैसे पर कैशबैक वह इस पर डिसाइड करेगा कि हमारे अंडरलाइंग एसेट कितना उपयोग हुआ है। यह अंडरलाइंग एसेट कितनी भोली है, जितना आप ऑनलाइन एसेट की वैल्यू बढ़ाओगे, विथ मी, आपके डेरिवेटिव की भी बढ़ेगी। डेरिवेटिव्स क्या होता है? डेरिवेटिव्स का मतलब है कि ऑप्शंस होने वाले हैं, उनकी तुलना अंडरलाइंग एसेट से होती है। जो हमारे इन सारे डिस्कशन में होने वाली शेयर्स या फिर निफ्टी या फिर ऐसा ही कुछ प्रवेश होने वाला है। वाला इक्विटी शेयर मार्केट का तो ऑप्शन भी अपडेट है। तो ऑप्शन की वैल्यू डिफाइन होगी उसके अंडरलाइंग एसेंट के बेसिस पर। पॉइंट-वन सेकंड में नाम में क्या लिखा है, ऑप्शन का मतलब है कि ऑप्शन आपको ऑप्शन देने वाला है। मतलब, जो भी ऑप्शन लाएगा, उसका एक ऐसा ऑप्शन होगा कि या तो कुछ बेच सकता है या कुछ खरीद सकता है। यहाँ पर आपको एक ऑप्शन मिलेगा, ध्यान से समझिए। ऑप्शन का मतलब है कि आपको वह जो ऑप्शन मिल रहा है, उस पर एक्सरसाइज करना है या नहीं। थोड़ी महत्वपूर्ण बात, ऑप्शन तो मिल गया। ऑप्शन के प्राइस भी होते हैं। अलग-अलग प्राइस पर ऑप्शन मिलते हैं, जैसे निफ्टी भी, उदाहरण के लिए, 9038 के स्तर पर है। अब आप P-फेस ऑप्शन ले सकते हैं या 850 से भी ले सकते हैं। वह क्या प्राइस होगी, वह भी आपको पता चल जाएगा। डिफाइन हुआ है क्योंकि आपको ऑप्शन मिल रहा है, मतलब एक प्रवेश मिल रही है। इस ऑप्शन को खरीदने के लिए आपको कुछ न कुछ भुगतान करना पड़ेगा, जो आपको पेमेंट करना होता है, वह होता है प्रीमियम। यह बेसिक ऑप्शन से संबंधित बात है, जिसे समझना जरूरी है। इससे पहले कि हम डेरिवेटिव को समझें, एक बात नोट कर लीजिए कि जो ऑप्शन होने वाला है, वह आपके पास ऑप्शन होगा, ऑब्लिगेशन नहीं। आपके पास राइट होगा। आप चाहें तो ऑप्शन को एक्सरसाइज करें और चाहें तो ऑप्शन छोड़ दें। जिसने भी ऑप्शन खरीदा है, उसे प्रवेश मिल रहा है। यह हमारा ऑप्शन का पाठ है। यहां तक कीजिए, कमेंट करें। डेरिवेटिव ऐसे फंक्शनल इंस्ट्रूमेंट होते हैं, जो अपने अंदर किसी थॉट प्रोडक्ट से अंडरलाइनिंग चेहरा करता है। ऑप्शन एक फॉल्स ओन अकाउंट ऑफ डेरिवेटिव्स हैं, और यह एक राइट है, जिसका इस्तेमाल आप कर सकते हैं। को एक्सरसाइज करें या न करें, अब हम समझते हैं मेन मुद्दा कि कॉल क्या होता है। फ्यूचर में कॉल और पुट ऑप्शंस के दो पार्ट होते हैं, जो ऑप्शंस की दुनिया में दो तरह के बेटे हैं। एक का नाम है कॉल, दूसरा का नाम है पुट। हमने कॉल को समझ लिया है, एक बेटे को समझ गए हैं, एक बेटा दोस्त बन गया है, और दूसरा बेटा पहले से ही आपका बहुत अच्छा दोस्त बन जाएगा। यह हम समझते हैं। पहले हम कॉल को समझेंगे। कॉल को समझने के लिए सबसे पहले बेसिक डिप्रेशन समझते हैं, उसके बाद एक आसान उदाहरण समझते हैं, फिर रियल लाइफ से मार्केट्स का उदाहरण लेकर समझेंगे। कॉल का मतलब है कि एक ऑप्शन जो हमें सही समय पर खरीदने का अधिकार देता है। यानी, कॉल क्यों खरीदा जाता है? वह आपको सही वक्त पर खरीदने का अधिकार देता है, और यह ऑप्शन होता है कि आप जब चाहें, तब खरीद सकते हैं। कॉल को एक आसान शब्द में समझें तो यह एक ऐसी चीज है जो आपको एक साइड में रखकर, आपके सौदे को आसान बनाता है। लैड एक पर एकुर्त प्राइस है, समझा मुझे नहीं समझा। टेक एनालिसिस का उदाहरण समझते हैं, क्रिकेट मैंने बहुत पसंद है। मैं 20 क्रिकेट लवर्स के जितने भी सब्सक्राइब हैं, सब जानते होंगे क्रिकेट का उदाहरण। समझते हैं, विराट कोहली बैटिंग कर रहा है। विराट कोहली पर निर्णय लिया गया है कि वह सॉफ्ट बनेगा या नहीं बनेगा, यह कॉल लेने वाले हैं। मतलब, एक होगा कॉल ऑप्शन। जैसा मैंने डिसाइड किया है, मैंने यह माना है कि विराट कोहली नहीं बनेगा। आपने कहा कि अगर विराट कोहली सॉफ्ट बनेगा, तो मुझे कुछ मिलना चाहिए क्योंकि मैं सह लूंगा। लेकिन, अगर विराट कोहली ने सॉफ्ट नहीं बनाया, तो मुझे कुछ मिलना चाहिए क्योंकि विराट कोहली ने कम बनाए। और मेरी बात सही साबित हुई। ठीक है, तो तुमने क्या डिसाइड किया कि आज के दिन ₹10..
06:29करोगे क्या हुआ यह क्रीम प्रधानमंत्री को पर क्योंकि आपने कहा कि अगर विराट कोहली बनाएगा, मैं एक ऑप्शन खरीदना चाहता हूं, कि अगर विराट कोहली ने तुरंत बनाए, हर एक एक्स्ट्रा रन के लिए आप मुझे एक रुपए दोगे। मैंने कहा ठीक है, मैं दूंगा। लेकिन अगर वह नहीं बना पाया, तो उसमें सारा जो भी पैसा आपने मुझे पर किया, वह मेल्ट हो गया। अब यह समझते हैं, आपने मुझे ₹10 का यह ऑप्शन खरीदा है, यानी आपने एक कॉल ऑप्शन खरीदा है। यह कौन है कि अगर विराट कोहली ने सौ से ऊपर रन बनाए, जितने रन होंगे, डेट चेक करके देख लें, तो मेरे को ₹50 मिलेंगे। आपको यह ऑप्शन खरीदने के लिए आपने मुझे ₹10 दिए हैं। मेरी इनकम क्या हो गई? वह ₹10 जो आपने मुझे पर किए हैं, यह समझते हैं। सबसे पहला सीनैरियो कि विराट कोहली ने सौ रन नहीं बनाए। अगर विराट कोहली ने सौ रन नहीं बनाए, तो आपने मुझे ₹10 दिए हैं। वह मीडियम हो गई है। आपके क्या कॉस्टिंग हैं, ₹10 जो मैक्सिमम था। बात खत्म। अगर विराट कोहली ने स्टोर रन बनाए, तो फिर क्या हुआ। सोरन पर हमें कुछ भी पिन करना सही नहीं है। नई दिल्ली शनिवार, मेरी इनकम तो ₹10 ही रही, और आपकी लास्ट जो ₹10 मुझे पेश किया, वह देख समझते हैं। अगर समझे, विराट कोहली ने 150 शतक बनाए, तो फिर क्या होगा? तो मुझे 150 - 100 मतलब ₹50, मुझे आपको पे करने पड़ेंगे। आपने मुझे ₹10 कर दिया था, तो नेट आउटफ्लो जो मेरे लिए होने वाला है, वह अनिवार्य है। रूपीस और आपकी इनकम होने वाली ₹50, समझा, समझा, समझा। यह ऑप्शन होगा। आपका यह ऑप्शन कौन सा? वहीं कॉल ऑप्शन। आप समझ चुके हैं। वापिस से समझते हैं। विराट कोहली सोरन तक आपने इस ऑप्शन को खरीदना है। उसके लिए अपने ₹10 मुझे करें। जैसे ही विराट कोहली सोरन के ऊपर बनाएगा, हर एक रन के लिए मुझे एक रुपए देना पड़ेगा। फॉर उदाहरण, विराट कोहली ने 105 रन बनाए। जब नंबर आते हैं, तो मुझे आपको ₹5 में पढ़ेंगे। आपने जो मुझे पीएम और ह्रदय चंद्रिका (विराट कोहली) के बारे में बताया, मतलब आपने मुझे ₹10 की हो। विराट का नंबर 105 है, तो मुझे आपको पांचवें स्थान पर रहने के लिए पढ़ना पड़ेगा। तो नेट इनकम मेरी होगी, पास उस पर आपको आगे नैक्सेस ₹500 समझा। यह हो गया कॉल ऑप्शन। कॉल ऑप्शन सही मूल्य पर अट्रैक्टिव प्राइस है। अब क्या बीच में कॉल ऑप्शन की वैल्यू कीिन हो सकती है? जी हाँ, हो सकती है। समझें, विराट कोहली 3434 मिलाकर नर्वस हो गया, तो हर नोट के होने के चांस हैं। थोड़ा सा लॉस करने लगे, तो इसका जंप होगा। वह बढ़ जाएगा क्योंकि प्रोबबिलिटी कि विराट कोहली सौरव की तुलना में बनेगा, कम हो जाएगी। और समझें, विराट किसी भी छक्के चलाकर छह छक्के मार रहा है, चार्ज उर्फ हैं और खेल रहा है। तो इसकी प्रीमियम कम हो जाएगी। पीएम क्यों कम होगा? क्योंकि विराट कोहली इस फोटो में अपने प्रीमियम को बना लेगा। इस विशेष पर विराट कोहली का प्रीमियम क्यों सो रन बन गया? पाया नहीं देख पाएगा इस कॉलOption पीएम प्लस सीट करेगा विराट को लेकर डिस्कशन। आप समझ चुके हैं, अब इसको रियल लाइफ इक्विटी मार्केट में अप्लाई करने की कोशिश करते हैं। समझिए, एसबीआई चल रहा है 182 ब्राउज़र में ताकि आपके लिए समझना बहुत ही आसान हो। अभी इस बीच चल रहा है, ठीक है। आपको एक कॉल बैक किया, आपने कॉल क्यों किया, राइट टू बाय, आपने कॉल बैक किया है। आपने किस राइट टू बाय किया, कितने का एसबीआई ₹10 का। इसके लिए आपने टॉपिक किया ₹10 का। मतलब आपने ₹10 का प्रीमियम दिया और ऑप्शन सेलर को अपने का देख, भाई सूरजित, अगर एसबीआई किसी भी बहुत पर चाहे, मुझे फर्क नहीं पड़ता। मेरे पास तुम्हारे खिलाफ ई राइट हुआ कि मैं एसबीआई को ₹200 में खरीद सकता हूँ, उनका चल ठीक है। मुझे लुक जॉब्स। अगर वह बनेगा, हां, ठीक है, मुझे ₹10 दे। मुझे लगता ही नहीं है कि बिग बॉस ऊपर से समृद्ध शॉपिंग का मज़ा कि आपने का नहीं, मुझे तो। लगता है कि यह 2030 तक पहुंच जाएगा, लेकिन मैं भी चाहता हूं कि मुझे इस बीच 200 पर मिल जाए, तो अपने बाकी ₹10 पेकेज। यह जो आपने फेस किया, वह ऑप्शन सेल हो गए, इंकम आपकी ₹10 की कॉस्ट। अब इससे आपने क्या बुक किया, आपने यह बुक कर लिया कि एसबीआई का कोई भी प्राइस हो, आपने जितनी क्वांटिटी खरीदी है, वह क्वांटिटी आपको दूसरे में मिलेगी। मान लीजिए, इसमें ₹300 हो जाएं, तो आप प्रॉफिट करेंगे, समझे। इसमें ड्राई फ्रूट्स हो गए। ठीक है, अगर आपके पास ऑप्शन का हंडसर में बाइक करने का ऑप्शन है, तो भाई, सैलेरी कब बोलोगे? यह ऑप्शन सेलेक्ट कर लें। सुन, तुझे मुझसे ऑप्शन मिला था कि मज़बानी कर सकता हूं, ₹10 में ला, मज़बान समझो। अपने सोर्स वेंक कर दिया था। म***** मेरे एसबीआई देख, उसने आपको सोएं। इससे लीजिए, आपने कहा, फिर मार्केट में क्या भाव चल रहा है? अरे वाह, मेरे पास ₹2 में स्वास्थ्य शिविर चला और मैंने टिश्यू में बेच दिया। ₹50 मेरी इनका प्रीमियम था, तो मेरी नेट इनकम ₹40 हो गई, यह हो गया कॉल ऑप्शन। कॉल ऑप्शन उसका राइट टू बाय है। आप एक राइड बाइक करते हो, एक ऑप्शन खरीदते हो कि आपको एक पर्टिकुलर प्राइस पर प्रोसेस खरीदने का ऑप्शन आ जाएगा। ठीक इसी को सेट फॉर ट्रीजियन ऑप्शन भी कहते हैं, और आप इसे सेल कर सकते हैं। और जहां हमें लग रहा है कि इस बीच तो नुकसान हो जाएगा, तो अब क्या किया जाए? अपने का या ₹100 कर लें, टेंशन नहीं जाएगी। तब क्या करें? हमने एक सलूशन निकाला है—पुट ऑप्शन। आप उसको मल्टीप्लाई कर लो, कितने का अभी वंश टीचर अपने ₹160 का। गुडबाय को लेकर ₹10 पहले ही दे दिए। तो हमारे साथ क्या फाइनल हुआ? हमने एक राइट टु सेल SBI शेयरें, जो 160 पर खरीदे थे। मतलब समझें, प्रॉफिट हो गया। जैसे इसमें से टूट और हो गया, तो आप ₹100 कमाते हो। आप ऑप्शन से खरीदेंगे, मैंने उससे पूछा, क्या खरीदना है? उसने कहा, आप ₹100 का ऑप्शन खरीद लो। मुझे तो एक साथ में भेजना है और आप उसको 107 में बेच दोगे, और जो मार्केट में 40 पर है वह आपको लॉस नहीं लगेगा, और आपने एक से लिंग पर इस पीस कर ली, मतलब समृद्ध किया जाए। न कॉल इधर, राइट टू बाय, आप एक राइट लाइक करो। ऐप्लिकेशन है, राइट है, मतलब मेरी इच्छा नहीं हुई। हु, इज चीफ 180 रह गया, मैंने 200 का कॉल बैक कर रखा है, तो मैंने एक्सप्रेस करूंगा, मतलब प्रीमियम लगा, मेरा वर्क हो गई। पटना एक्सरसाइज नहीं करूंगा, क्योंकि जिस एक्सरसाइज प्राइस का मैंने कॉल खरीदा है, उससे नीचे ही मार्केट प्राइस है। कि तुम्हें गर्ल वांट्स, राइट टू बाय, कॉल इज राइट टू बाय, व्हाट इज राइट टू सेल, आपने डिपॉजिट कर दिया कि 160वें मैं तो इसमें बैठूंगा। चैबे ₹70, ₹50 जितने अपने से स्प्रेड किया है, उस चीज को अपने डिसाइडेड टु बे कर सकते हो। समझा? अब इसमें पांच महत्वपूर्ण चीज होती हैं, जो मैं समस्या होती है, सबसे पहले होता। यह स्ट्राइक प्राइस, स्ट्राइक पर इसे हफ्ते में समझते हुए ही जिम्मेदार समझ लिया है। समझो अभी इस बीच चल रहा है, वह मिट्टी स्ट्राइक प्राइस, वह प्राइस जिसके लिए आप स्ट्राइक कर रहे हो, जैसे मैंने कॉल लेंदेन के लिए प्राइस है 160, तो यह 210 या फिर जर्मनी के डिब्बे का, तो 160, यह हो गया कि स्ट्राइक प्राइस, स्ट्राइक पर गिवर है, जिस प्राइस का आप कॉल या पुरुष कर रहे हो। योर गिफ्ट सेकंड प्रीमियम पेमेंट चाहिए। ब्लूटूथ अपने पेट किया, यह राइड बाइक करने के लिए। वह गया प्रीमियम जैसे विराट कोहली के सभी 10 वें फिल्म ओपन लिया था। यहां पर भी एसबी के समय अपने 10 रुपये थे। उदाहरण लिया था। तो यह है कि आप टीम ने नेक्स्ट इंपोर्टेंट बात आती है कि आप ऑप्शन बाइक कर रहे हो, यह सेल कर रहे हो, उस पर डिपेंड करेगा। अगर आपने ऑप्शन लिखा तो आपको प्रीमियम देना पड़ेगा। ऑप्शनल है तो प्रीमियम मिलेगा। ऑप्शन सेलरी, प्रीमियम इनकम अधिकतम हो सकती है। ऑप्शन बाय का प्रीमियम, अधिकतम लॉस है। मतलब समझो, अपने दो ₹100 के कॉल ऑप्शन बज़ू रखे हैं, SBI का। मेरे को अधिकतम नुकसान होगा वह ₹10, जो मैंने पेश किया है। बस ऑप्शन सेलरी को अधिकतम पर सेट किया है। वह ₹10, जो आपने किया है। योग्य, तीसरा और चौथा महत्वपूर्ण पॉइंट, ऑप्शंस को खरीदने से पहले बेसिक सारी बातें जानना जरूरी है। आज हमने बिल्कुल बेसिक बात की है। धीरे-धीरे लेवल बढ़ेगा। मिक्सर की जगह, अभी हम कोई भी ट्रेड नहीं करेंगे। हमें पहले बेसिक सारी बातें समझनी हैं, उसके बाद ही ट्रेड करना है। और फीस जैसी इच्छाएं पूरी करनी हैं, सीधे ट्रेंड में जाना है। उसके बाद भी ऑप्शन में मीटिंग है। बहुत सावधानी से चलना है। यह मुझे आपको बताना बहुत जरूरी है। ऑप्शन बहुत अच्छा होता है। क्या ऑप्शन है? प्रोफाइल होता है, रवैया होता है, सेलर को भी। समझेंगे मेरे मुताबिक, हमें एक ऑप्शन सेल करके काम करना चाहिए। हर चीज को स्टेड़ीम समझेंगे, उसके बाद भी आप कुछ ऑप्शन में पॉज़ीशन रखना शुरू करें, लिमिटेड रखिए। पहले ठीक से सीखिए, छह महीने या एक साल तक लगातार इस विषय पर अध्ययन कीजिए। इस वीडियो में दिए गए सभी तथ्यों को समझिए, फिर खुद प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस करिए, उसके बाद ही कोई भी सवाल पूछिए। वरना, ऑप्शंस में लॉस बहुत होते हैं, हम सारी बातें आने वाले वीडियो में कवर करेंगे। अगर यह वीडियो अच्छा लगा हो तो दोस्तों के साथ शेयर कीजिए, उनको भी बता दीजिए कि ऑप्शंस की दुनिया कैसी होने वाली है, और यह बहुत ही इंटरेस्टिंग है। मिलेंगे अगले वीडियो में। तब तक के लिए धन्यवाद। अगर आप अपना अकाउंट खोलना चाहते हैं, तो डिस्क्रिप्शन में लिंक है। साथ ही, अगर आप चाहते हैं कि हम आपका फर्ज़ पोर्शन भी करें, तो भी वहां क्लिक कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड की बात करो तो डिस्क्रिप्शन में हेल्पलाइन नंबर पर कर सकते हैं। हेल्थ इंश्योरेंस, शॉर्ट टर्म इंश्योरेंस, हेल्पलाइन नंबर डिस्क्रिप्शन में दे रखे हैं। मिलेंगे अगले वीडियो में। तब तक ठप इन्वेस्टिंग, मोर ऑप्शंस, ज्योतिष में बने रहिए, बहुत इंटरेस्टिंग होने वाला है। जिससे मैं आगे बढ़ते जाएंगे। सी यू वेरी सून। ओएम हुआ था।